“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.21

संस्कृत श्लोक

आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् |
मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ||१०-२१||
ādityānāmahaṃ viṣṇurjyotiṣāṃ raviraṃśumān .
marīcirmarutāmasmi nakṣatrāṇāmahaṃ śaśī ||10-21||

हिंदी अर्थ

।।10.21।। मैं (बारह) आदित्यों में विष्णु और ज्योतियों में अंशुमान् सूर्य हूँ; मैं (उनचास) मरुतों (वायु देवताओं) में मरीचि हूँ और नक्षत्रों में शशी (चन्द्रमा) हूँ।।

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