“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.7

संस्कृत श्लोक

एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः |
सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः ||१०-७||
etāṃ vibhūtiṃ yogaṃ ca mama yo vetti tattvataḥ .
so.avikampena yogena yujyate nātra saṃśayaḥ ||10-7||

हिंदी अर्थ

।।10.7।। जो पुरुष इस मेरी विभूति और योग को तत्त्व से जानता है, वह पुरुष अविकम्प योग (अर्थात् निश्चल ध्यान योग) से युक्त हो जाता है, इसमें कुछ भी संशय नहीं है।।

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