“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.40

संस्कृत श्लोक

नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप |
एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया ||१०-४०||
nānto.asti mama divyānāṃ vibhūtīnāṃ parantapa .
eṣa tūddeśataḥ prokto vibhūtervistaro mayā ||10-40||

हिंदी अर्थ

।।10.40।। हे परन्तप ! मेरी दिव्य विभूतियों का अन्त नहीं है; अपनी विभूतियों का यह विस्तार मैंने एक देश से अर्थात् संक्षेप में कहा है।।

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