“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
Home›Chapters›Chapter 10›Shloka 3

अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.3

संस्कृत श्लोक

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् |
असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ||१०-३||
yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram .
asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate ||10-3||

हिंदी अर्थ

।।10.3।। जो मुझे अजन्मा, अनादि और लोकों के महान् ईश्वर के रूप में जानता है, र्मत्य मनुष्यों में ऐसा संमोहरहित (ज्ञानी) पुरुष सब पापों से मुक्त हो जाता है।।

▶ वीडियो (YouTube)

इस श्लोक का वीडियो जोड़ेंWordPress Admin → Gita Shlokas → Shloka 10.3 → YouTube Video URL