“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.24

संस्कृत श्लोक

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् |
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ||१०-२४||
purodhasāṃ ca mukhyaṃ māṃ viddhi pārtha bṛhaspatim .
senānīnāmahaṃ skandaḥ sarasāmasmi sāgaraḥ ||10-24||

हिंदी अर्थ

।।10.24।। हे पार्थ ! पुरोहितों में मुझे बृहस्पति जानो; मैं सेनापतियों में स्कन्द और जलाशयों में समुद्र हूँ।।

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