“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.1

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच |
भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः |
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ||१०-१||
śrībhagavānuvāca .
bhūya eva mahābāho śṛṇu me paramaṃ vacaḥ .
yatte.ahaṃ prīyamāṇāya vakṣyāmi hitakāmyayā ||10-1||

हिंदी अर्थ

।।10.1।। श्रीभगवान् ने कहा -- हे महाबाहो ! पुन: तुम मेरे परम वचनों का श्रवण करो, जो मैं तुझ अतिशय प्रेम रखने वाले के लिये हित की इच्छा से कहूँगा।।

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