“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.22

संस्कृत श्लोक

वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः |
इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ||१०-२२||
vedānāṃ sāmavedo.asmi devānāmasmi vāsavaḥ .
indriyāṇāṃ manaścāsmi bhūtānāmasmi cetanā ||10-22||

हिंदी अर्थ

।।10.22।। मैं वेदों में सामवेद हूँ, देवों में वासव (इन्द्र) हूँ; मैं इन्द्रियों में मन और भूतप्राणियों में चेतना (ज्ञानशक्ति) हूँ।।

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