“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.13

संस्कृत श्लोक

आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा |
असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ||१०-१३||
āhustvāmṛṣayaḥ sarve devarṣirnāradastathā .
asito devalo vyāsaḥ svayaṃ caiva bravīṣi me ||10-13||

हिंदी अर्थ

।।10.13।। ऐसा आपको समस्त ऋषिजन कहते हैं;  वैसे ही देवर्षि नारद, असित, देवल ऋषि तथा व्यास और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं।।

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