“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 10 – विभूतियोग

भगवान की दिव्य विभूतियों का वर्णन।

श्लोक 10.14

संस्कृत श्लोक

सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव |
न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः ||१०-१४||
sarvametadṛtaṃ manye yanmāṃ vadasi keśava .
na hi te bhagavanvyaktiṃ vidurdevā na dānavāḥ ||10-14||

हिंदी अर्थ

।।10.14।। हे केशव ! जो कुछ भी आप मेरे प्रति कहते हैं, इस सबको मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्, आपके (वास्तविक) स्वरूप को न देवता जानते हैं और न दानव।।

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