“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग

त्याग, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का समग्र उपसंहार।

श्लोक 18.33

संस्कृत श्लोक

धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः |
योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी ||१८-३३||
dhṛtyā yayā dhārayate manaḥprāṇendriyakriyāḥ .
yogenāvyabhicāriṇyā dhṛtiḥ sā pārtha sāttvikī ||18-33||

हिंदी अर्थ

।।18.33।। सात्त्विकी है।।

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