“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग

त्याग, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का समग्र उपसंहार।

श्लोक 18.43

संस्कृत श्लोक

शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम् |
दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम् ||१८-४३||
śauryaṃ tejo dhṛtirdākṣyaṃ yuddhe cāpyapalāyanam .
dānamīśvarabhāvaśca kṣātraṃ karma svabhāvajam ||18-43||

हिंदी अर्थ

।।18.43।। शौर्य, तेज, धृति, दाक्ष्य (दक्षता), युद्ध से पलायन न करना, दान और ईश्वर भाव (स्वामी भाव) - ये सब क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं।।

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