“योगः कर्मसु कौशलम्”
— भगवद्गीता (2.50)
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अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग

त्याग, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का समग्र उपसंहार।

श्लोक 18.62

संस्कृत श्लोक

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत |
तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम् ||१८-६२||
tameva śaraṇaṃ gaccha sarvabhāvena bhārata .
tatprasādātparāṃ śāntiṃ sthānaṃ prāpsyasi śāśvatam ||18-62||

हिंदी अर्थ

।।18.62।। हे भारत ! तुम सम्पूर्ण भाव से उसी (ईश्वर) की शरण में जाओ। उसके प्रसाद से तुम परम शान्ति और शाश्वत स्थान को प्राप्त करोगे।।

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