अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग
त्याग, कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष का समग्र उपसंहार।
श्लोक 18.70
संस्कृत श्लोक
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावयोः |
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः ||१८-७०||
ज्ञानयज्ञेन तेनाहमिष्टः स्यामिति मे मतिः ||१८-७०||
adhyeṣyate ca ya imaṃ dharmyaṃ saṃvādamāvayoḥ .
jñānayajñena tenāhamiṣṭaḥ syāmiti me matiḥ ||18-70||
jñānayajñena tenāhamiṣṭaḥ syāmiti me matiḥ ||18-70||
हिंदी अर्थ
।।18.70।। जो पुरुष, हम दोनों के इस धर्ममय संवाद का पठन करेगा, उसके द्वारा मैं ज्ञानयज्ञ से पूजित होऊँगा - ऐसा मेरा मत है।।
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